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| كر
پشتك خاللرينده، گاهي جفت و گاهي تك |
گل
اي مهوش كرم قبل دامن زلفنگ بوقارو چك |
-176 |
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جواب چيستان |
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| وز
شِكوه من نداشت يك ذره شكوه |
آن
غم كه شدم از غم رويش آگاه |
-177 |
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| دندان
من و قدمن و دامن كوه |
درمانده
شدم زغم بگفتم نامش |
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جواب چيستان |
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| گويم
به كنايتي كه درماند حر |
آن
حقّه كه در ندارد و باشد پر |
-178 |
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| ساينده
به لعل و آزماينده به در |
خوبان
چو بلورشان شود عنابي |
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جواب چيستان |
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| در
ميان پيرهن، يك تن دو سر يعني كه چه |
در
ولايايت علي شمس و قمر يعني كه چه |
-179 |
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| دختر
بي شوهر بكر و پسر يعني كه چه |
اي
منافق، قدرت حق را ببين و دم مزن |
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جواب چيستان |
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| جفتند
ولي زهم جدايند |
يك
جفت كبوترند ابلق |
-180 |
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| از
كالبدشان برون نيايند |
پرواز
كنند گردِ عالم |
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جواب چيستان |
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| بر
سرهر شاخ او سه درختر افسونگر است |
اژدري
ديدم كه او را چار شاخ اندر سر است |
-181 |
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| هر
پسر را بيس و چار فرزند ديگر در خور
است |
بر
سر هر درختري، بنشسته باشد سي پسر |
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جواب چيستان |
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| در
برِ او قباي عنابي |
اين
چه چيز است، لعبتي آبي |
-182 |
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| پايِ
او همچو پاي مرغابي |
تنِ
او همچو ساعد سعد است |
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جواب چيستان |
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| وز
آتش سرخ تاج و افسر دارد |
اين
چيست كه تاج نقره بر سر دارد |
-183 |
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| بر
گردنش از هر طرفي زنجير است |
ناكرده
گناه روي او چون قير است |
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جواب چيستان |
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| اهل
حقّه، تمام سربسته |
حقّه
ئي ديده ايم دربسته |
-184 |
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| صاف
و رنگين به يكدگر بسته |
همه
ياقوت رنگ و لعل صفت |
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جواب چيستان |
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| پريرويان
به بستان تازه ديدم |
عجايب
صنعت ناديده ديدم |
-185 |
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| به
يك مَحمِل دو صد دُردانِه ديدم |
چو
دَس بردم گل از باغش بچينم |
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جواب چيستان |
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| روز
وشب گردد و قدم نزند |
چيست
گردنده ئي كه دم نزند |
-186 |
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| برف
بارد و ليك دم نزند |
نعره
او به سان شير بُوَد |
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جواب چيستان |
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| ماده
بر روي نر وطن دارد |
صنعتي
ديده ام كه فن دارد |
-187 |
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| در
ميان شكم دهن دارد |
قوتِ
او قوتِ آدميزاد بوده است |
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جواب چيستان |
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| كه
نر خوابيده بود و ماده مي گشت |
عجايب
صنعتي ديدم دراين دشت |
-188 |
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جواب چيستان |
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| وز
خَمي هر دو سر به هم دارد |
آن
چه باشد كه پشت خَم دارد |
-189 |
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| صد
مني را به پشت بر دارد |
وزن
او نيست خود به صد مثقال |
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جواب چيستان |
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| پاي
او غرق در دل خاك است |
آن
چه باشد كه سر بر افلاك است |
-190 |
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| گوشت
شيرين و استخوان چاك است |
رنگ
او سرخ و زرد و گاه سياه |
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جواب چيستان |
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شكل
ديگر همين معما: |
-191 |
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| پاي
او غرق در دلِ خاك است |
چيست
آن تن كه سر بر افلاك است |
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| گوشت
شيرين و استخوان چاك است |
يك
تن و سي هزار فرزندان |
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| نامش
از اين دو جنس ناپاك است |
نيمي
از مار و نيمي از خرگوش |
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جواب چيستان |
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| اندر
صفِ مردان خدا جا دارد |
آن
چيست كه جا به كوه و صحرا دارد |
-192 |
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| سيصد
سرو ده شكم دو صد پا دارد |
از
هيبت او جمله بلرزد عالم |
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جواب چيستان |
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| رنگ
رخ عاشقان مسكين دارد |
آن
چيست كه رنگ گل زرّين دارد |
-193 |
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| بوي
خوشِ او محلّه ها مي گيرد |
دسمالِ
سرش بادِ هوا مي گيرد |
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| نونش
ميدن به كوزه مثقالي |
آبش
ميدن، طَبَق طَبَق مرواري |
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جواب چيستان |
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| صد
پاره تنش بود به يك پاي نگون چون |
آن
چيست كه روزمي نمايد شبگون |
-194 |
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| همچون
عاشق زچشم او ريزد خون |
ناز
كني تنش زاندازه فزون |
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جواب چيستان |
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شكل
ديگر همين معما: |
-195 |
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| صد
پاره تنش، ولي به يك پايه نگون |
آن
چيست كه روزها نمايد شبگون |
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| همچون
دل عاشقان فرو ريزد خون |
چون
دست بر او نهي زاندازه فزون |
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جواب چيستان |
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| به
شباهت نظير يكدگر است |
آن
چه باشد كه زرد مثل زر است |
-196 |
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| معدنش
در ميان دشت ودر است |
قيمت
آن بسي گردان نَبُوَد |
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جواب چيستان |
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| مشاطه
زلفِ دلبران است |
آن
چيست كه پيك عاشقان است |
-197 |
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| رقصِ
چمن از نواي آن است |
خنديدن
گل زبوسه اوست |
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جواب چيستان |
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| ديدم
صنمي نشسته در پيش پدر |
در
باغ شدم به چيدن نرگس تر |
-198 |
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| گفت:
امروزنه، فردانه، چو شد روز دگر |
گفتم:
صنما، بوسه بده صدقه سر |
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هم
بوسه و هم ليسه و هم چيز دگر |
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جواب چيستان |
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| پس
آنگه رو تماشا كن جمال يارجاني را |
فكن
از مطلع سبع المثاني حرف ثاني را |
-199 |
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جواب چيستان |
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| دو
حرف زنظم حافظ مرتجل است |
محبوبه
من كه مَه ز رويش خجل است |
-200 |
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| وين
طرفه كه قلب آخرش خون دل است |
اول
و ششم هجا و قلبش روشن |
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جواب چيستان |
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بعدي
12
11
10
9
8
7
6
5
4
3
2
1
قبلي |
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