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اي
نام تو
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اي
نام تو بهترين سرآغاز
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بي
نام تو نامه كي كنم باز
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اي
ياد تو مونس روانم
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جز
نام تو نيست بر زبانم
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اي
كارگشاي هر چه هستند
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نام
تو كليد هر چه بستند
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اي
هست كنِ اساسِ هستي
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كوته
ز درت دراز دستي
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اي
مقصد همت بلندان
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مقصود
دل نيازمندان
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اي
سرمه كش بلند بينان
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در
باز كن درون نشينان
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اي
بر ورق تو درس ايام
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زآغاز
رسيده تا به انجام
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صاحب
تويي آن دگر غلامند
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سلطان
تويي آن دگر كدامند
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راه
تو به نور لايزالي
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از
شركت و شريك هر دو خالي
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در
صنع تو كآمد از عدد بيش
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عاجز
شده عقل علت انديش
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در
عالم عالم آفريدن
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بِه
زين نتوان رقم كشيدن
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هر
دم نه به حق دسترنجي
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بخشي
به من خراب، گنجي
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گنج
تو به بذل كم نيايد
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وز
گنج كس اين كرم نيايد
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از
قسمت بندگي و شاهي
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دولت
تو دهي به هر كه خواهي
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از
آتش ظلم و دود مظلوم
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احوال
همه تو راست معلوم
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هم
قصه نانموده داني
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هم
نامه نانوشته خواني
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هم
تو به عنايت الهي
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آنجا
قدمم رسان كه خواهي
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از
ظلمت خود رهاييم ده
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با
نور خود آشناييم ده
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