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خاك
ضعيف
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اي
همه هستي ز تو پيدا شده
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خاك
ضعيف از تو توانا شده
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زيرنشين
عَلَمت كاينات
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ما
به تو قائم چو تو قائم به ذات
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هستي
تو صورت پيوند ني
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تو
به كس و كس به تو مانند ني
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آنچه
تغيّر نپذيرد تويي
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وانكه
نمردست و نميرد تويي
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ما
همه فاني و بقا بس توراست
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ملك
تعالي و تقدس تو راست
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خاك
به فرمان تو دارد سكون
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قبه
خضرا تو كني بي ستون
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جز
تو فلك را خم چوگان كه داد
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ديگ
جسد را نمك جان كه داد
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چون
قدمت بانگ بر ابلق زند
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جز
تو كه يارد كه اناالحق زند
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تا
كرمت راه جهان بر گرفت
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پشت
زمين بار گران برگرفت
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گرنه
ز پشت كرمت زاده بود
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ناف
زمين از شكم افتاده بود
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عقد
پرستش ز تو گيرد نظام
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جز
به تو بر، هست پرستش حرام
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هر
كه نه گوياي تو خاموش به
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هر
چه نه ياد تو فراموش به
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ساقي
شب، دستكش جام توست
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مرغ
سحر دستخوش نام توست
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پرده
برانداز و برون آي فرد
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گر
منم آن پرده به هم در نورد
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تاكي
از اين راه نو روزگار
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پرده
اي از راه قديمي بيار
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طرح
برانداز و برون كش برون
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گردن
چرخ ازحركات و سكون
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آب
بريز آتش بيداد را
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زيرتر
از خاك نشان باد را
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گر
چه كني قهر بسي را زما
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روي
شكايت نه كسي را زما
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بنده
نظامي كه يكي گوي توست
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در
دو جهان خاك سر كوي توست
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خاطرش
از معرفت آباد كن
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گردنش
از دام غم آزاد كن
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