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توحيد |
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به
نام آنكه هستي نام ازو يافت |
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فلك
جنبش زمين آرام ازو يافت
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خداي
كافرينش در سجودش
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گواهي
مطلق آمد بر وجودش
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تعالي
الله يكي بي مثل و مانند
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كه
خوانندش خداوندان خداوند
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فلك
بر پاي دار و انجم افروز
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خرد
را بي ميانجي حكمت آموز
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جواهر
بخش فكرتهاي باريك
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به
روز آرنده شبهاي تاريك
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غم
و شادي نگار و بيم و اميد
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شب
و روز آفرين و ماه و خورشيد
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نگه
دارنده بالا و پستي
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گوا
بر هستي او جمله هستي
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وجودش
بر همه موجود قاهر
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نشانش
بر همه ذرّات ظاهر
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كواكب
را به قدرت كارفرماي
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طبايع
را به صنعت گوهر آراي
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سواد
ديده باريك بينان
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انيس
خاطر خلوت نشينان
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خداوندي
كه چون نامش بخواني
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«نيابي
درجوابش «لن تراني
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گَهْ
از خاكي چو ما نقشي برآرد
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خرد
بخشيد تا او را شناسيم
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بصارت
داده تا از وي هراسيم
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نبات
روح را آب از جگر داد
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چراغ
عقل را پيه از بَصَر داد
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چنان
كرد آفرينش را به آغاز
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كه
پي بردن نداند كس بدان راز
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نشايد
باز جست از خود خدايي
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خدايي
برتر است از كدخدايي
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بفرسايد
همه فرسودنيها
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همو
قادر بود بر بودنيها
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چو
بخشاينده و بخشنده جود
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نخستين
مايه ها را كرد موجود
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به
هر مايه نشاني داد از اخلاص
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كه
او را در عمل كاري بود خاص
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يكي
را داد بخشش تا رساند
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يكي
را كرد ممسك تا ستاند
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نه
بخشنده خبر دارد ز دادن
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نه
آنكس كو پذيرفت از نهادن
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نه
آتش را خبر كو هست سوزان
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نه
آب آگه كه هست از جان فروزان
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خداونديش
با كس مشترك نيست
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همه
حمال فرمانيم و شك نيست
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بسنجد
خاك و مويي بر ندارد
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بيارد
باد و بويي بر ندارد
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زهي
قدرت كه در عبرت فزودن
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تواند
اين چنين نقشي نمودن
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